Tag Archives: what is definition of truth

The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:17

“कोई विरला ही शिष्य तत्व-ज्ञान के हेतु गुरु की शरण में होता है, वास्तव में तो वह अपने दुःख, अन्तर्द्वन्द, हताशा व जीवन में अंधकार की पीड़ा के निवारण की आकांक्षा से ही आता है। यह तो गुरु की विशेषता है जो इस शान्ति-समन्वय व सुख के खोजी को वह परम ज्ञान की अभीप्सा में परिवर्तित कर देता है। गुरु के शब्दों में वह शक्ति होनी चाहिए जो आगन्तुक पीड़ित शिष्य के अंतरतम को उद्वेलित कर सके। फिर कृष्ण तो स्वयं गुरुश्रेष्ठ हैं – अपने वचनों में शब्दों का सटीक चुनाव कृष्ण की वह कला है जो उन्हें परम-विशिष्ट बनाती है। युद्ध-भूमि में तत्त्व-ज्ञान देना कोई साधारण बात नहीं – शायद ही इतिहास में इसके पहले ऐसा कोई विवरण मिले। पर कृष्ण जैसा कुशल वक्ता गुरु-रूप में प्रकट होता है तो यह भी संभव कर देता है।” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

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The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:16

“सत्य शाश्वत है, निरंतर है, कल्याणकारी है, शिव है। सत्य इन्द्रियों का विषय नहीं। सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत्य का कोई अस्तित्व ही नहीं है। वास्तव में जब तक हम पूर्ण सत्य से परिचित नहीं तब तक हम असत्य में जीते हैं। आपका संसार असत्य है परन्तु तत्त्व-दर्शी का एक तत्त्व शक्ति विज्ञान के सिद्ध के लिए यही संसार सत्य का परम सौंदर्य है – उस परम सत्य, शिव के इसी सौंदर्यपूर्ण समस्त संसार की रचना को हम शाक्त ‘महात्रिपुरसुंदरी’ कहते हैं।” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

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