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The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:22-23

“समाधि भी तो स्थाई नहीं – लगेगी और टूटेगी। तुर्या या चौथा ही समाधान है। इसीलये मैं हमेशा कहता हूँ, जीते जी अपना चौथा कर डालो तो ही परम आनंद, मुक्ति, आह्लाद , प्रह्लाद ! ” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

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