Tag Archives: gita chapter 2 verse 21

The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:21

“जिस दिन यह थोड़ा सा भी स्पष्ट हुआ कि यह शरीर मैं नहीं हूँ बस उसी क्षण मृत्यु समाप्त हो जाती है, वास्तविक यात्रा प्रारम्भ होती है। उसके पहले जो करते हो सब तैयारी ही है इससे अधिक और कुछ नहीं। ” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

Posted in Gita by Master AD | Tagged , , , , , , , , , | Leave a comment