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The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:16

“सत्य शाश्वत है, निरंतर है, कल्याणकारी है, शिव है। सत्य इन्द्रियों का विषय नहीं। सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत्य का कोई अस्तित्व ही नहीं है। वास्तव में जब तक हम पूर्ण सत्य से परिचित नहीं तब तक हम असत्य में जीते हैं। आपका संसार असत्य है परन्तु तत्त्व-दर्शी का एक तत्त्व शक्ति विज्ञान के सिद्ध के लिए यही संसार सत्य का परम सौंदर्य है – उस परम सत्य, शिव के इसी सौंदर्यपूर्ण समस्त संसार की रचना को हम शाक्त ‘महात्रिपुरसुंदरी’ कहते हैं।” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

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