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The Gita: Srimad Bhagwadgita: श्रीमद्भगवद्गीता : Chapter 2:19

“गीता मूक रूप से यह उद्घोष करती है कि कोई यदि मेरे एक भी सारगर्भित श्लोक को अपने जीवन में परख लें तो वह पार हो जायेगा। पर कोई ही शिष्य उस जौहरी के समान होता है जो गुरु द्वारा दिए गए तत्व-ज्ञान को अपने अनुभव की कसौटी पर घिस-रगड़ कर परखता है।” – आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ Continue reading

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