Tantra – Total acceptance of Cosmic Love Energy

||No barriers Within ||

||No barriers Within ||

जीवन का आधार है प्रेम । प्रेम है एक शक्ति, एक आकर्षण जिससे जगत को आधार मिलता है, अभिव्यक्ति मिलती है । इस ब्रह्माण्ड के उद्भव के क्षण से इसी एक शक्ति ने अलग अलग रूपों में अपने को व्यक्त किया है – चाहे वो परमाणुवीय कणो या आकाशीय पिंडो के मध्य गुरुत्वाकर्षण हो, गतिशील आवेशों के बीच चुम्बकीय-विद्युतीय बल या जीव-जगत में यौन-आकर्षण ।  प्रेम ही वह शक्ति है जो इस भौतिक जगत के तथाकथित मृदा अवयवों को पास लाकर, आपस में जोड़ कर जीवन के आधार, प्रकृति का निर्माण करती है । इसी शक्ति से जीव संतति-वर्धन में संलग्न होता है । जिधर तक मानवीय कल्पना की पहुँच है प्रेम-शक्ति ही नृत्य में रत दीखती है। वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड की जिस रहस्यमय आकर्षण-विकर्षण शक्ति के विभिन्न रूपों का गहन अध्ययन बाह्य जगत में किया उसी ऊर्जा के मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्रवाह का अध्ययन हमारे प्राचीन ऋषियों ने भी किया है । बाह्य अध्ययन का संकलन है आज का भौतिक विज्ञान और आतंरिक नियमो का संकलन है तंत्र-विज्ञान।

 

बाह्य भौतिक जगत में क्रियमाण प्रेम-ऊर्जाओं  के नियमों की समझ ने ही हमारे भौतिक जीवन की सुख-सुविधाओं को सम्भव बनाया है । विद्युत्, घर्षण, चुम्बकत्व, नाभिकीय आदि बलों का सम्यक उपयोग बिना भौतिक विज्ञान की सही समझ के नहीं किया जा सकता है । ठीक इसी प्रकार यदि मानव शरीर में प्रवाहित हो रही इन ऊर्जाओं का प्रबंधन हो सके तो मनुष्यता के बहु-आयामी विकास की एक क्रांतिकारी शुरुआत हो सकती है।

 

तंत्र कहता है कि इस मानव शरीर में ऊर्जाओं के सात केंद्र या चक्र हैं व इन्ही सप्त-चक्रों (मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा एवं सहस्रार) के बीच प्रेम-शक्ति का सतत एवं सम्यक प्रवाह ही सम्यक स्वास्थ्य है । सम्यक स्वास्थ्य से आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति ही शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास में सक्षम हो सकता है । सम्यक स्वस्थ मनुष्य ही रचनात्मकता, क्रियाशीलता व शुद्ध आध्यात्मिकता से युक्त हो सकता है । तंत्र की विशेष प्रक्रियाओं के द्वारा हम मनुष्य अपने निचले पांच चक्रों के माध्यम से प्रकृति की पांच रचनात्मक ऊर्जाओं (पञ्च महाभूतों) से संवाद कर सकते हैं । चूंकि इन्ही पञ्च-महाभूतों की ऊर्जाओं से इस समष्टि का निर्माण होता है इसलिए तंत्र इन पञ्च-तत्वों कि ऊर्जाओं के संयमन द्वारा मानव जीवन में समृद्धि व प्रगति का पथ प्रशस्त करने के उपाय देता है। छठे व सातवे ऊर्जा चक्रों के माध्यम से मनुष्य पारलौकिक शक्तियों से सम्बन्ध स्थापित करने में सक्षम हो सकता है और दिव्यता को उपलब्ध होता है ।

 

तंत्र भारतीय मनीषियों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज है । मनुष्य शरीर के अंतरतम में छुपी अन्यान्य गुप्त ऊर्जा धाराओं का उसके सर्वांगीण विकास में लाने की इस विधा की आज हमें पहले से ज़यादा जरूरत है।

– Ach. Agyaatdarshan Anand Nath

About Ach. Agyaatdarshan Anand Nath

Master AD, as Acharya Agyaatdarshan Anand Nath is lovingly called by his disciples, friends is a true Tantra Master. You can either love him or hate him but for sure you can NOT ignore him. He and his beloved consort Ma Shakti Devpriya Anand Nath are engaged in spreading scientific spirituality in masses through their Tattva Shakti Vigyaan initiation camps. Master AD has equal command on Yoga, Pranamaya, Tantra and Kriya Yoga techniques and guides seekers worldwide.
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One Response to Tantra – Total acceptance of Cosmic Love Energy

  1. msanjana says:

    Reblogged this on Bindas Spirituality.

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